शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

क्षणिकाएँ

सन्देश भेजा है ।
न कबुतरो से ,न चिट्ठियों में ।

बात की बात जाये ,कोई भाव जगाये ।
इस प्रक्रिया में भावनाओ का ह्रस हो सकता है ।
बात जो इशारो में कही गई ।
उसको चेहरे में दिखने से रोका नहीं जा सकता है ।
संबंधो की शुरुआत इच्छाओं, व्यवहार में परिवर्तन,
और आँखों के टकराहट से होती है ।
मगर संबंधो का निर्वहन इशारो , मनोभावो ।
और मुस्कराहट से होता है ।

संतुलित हृदयाभावो के अभाव में ,
चयन की मांग होती है ।
चयन प्रक्रिया आँखों के मिलने से मात्र आरम्भ हो कर ,
मुस्कराहट के आदान प्रदान से समाप्त होती है ।

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