गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

यू एन मी

सृष्टि का सौन्दर्य ,
न तो त्रुटी विहीनता में ,
न तो कारन कार्य के सफल सम्बन्ध में ,
क्रियाओ के मूक संपादन में भी नहीं ।
जनम देने से पालने तक ।
शांत नीरव नभ से लेकर ,
उद्वेलित सागर धाराओ तक ।
किसी में भी नहीं ।

जीवन बीत जाये ,सम्बन्ध निभ जाये ।
अलगाव क्षणिक ही होगा ।
शीघ्र ही पुनः मिल जाये ।
भाई भाई के लिए , भाई बहन के लिए ।
और पत्नी पति के लिए ।
सभी ने आपने लिए सब कुछ नहीं माँगा ।

सृष्टी का सौंदर्य ,
सटीक अनुपातिक गुणों और अवगुणों के ,
बटवारे में है ।
मिलन की व्याकुलता में ,
उपहारों की परंपरा में ,
जीवनपर्यंत आनंयोश्रिता में है ।
रुदन के भावो और मुस्कराहट के ,
आश्रय के आदान प्रदान में  है ।
भाग्य में विपत्तियो के होने में ,
और विपतियो में हमारे अलग हो सकने में नहीं ,
साथ होने में है ।

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