शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

बीते सालो में

बीते सालो में ,
मै ज्यादातर समय घर पर ही रहा ,
घर की अपनी महिमा होती है ।
घर उसमे रहने वाले को निजता प्रदान करता है।
और निजी मामले तैयार करता है ।
जो समाज हर मामले को ,
निजी करके टालता हो ,
उसमे व्यक्तिगत विषयो पर टिप्पणिया ,
कम ही मिलती है ।
समाज और व्यक्तिगत जीवन में,
कुछ तो अंतर होना चाहिए ।

जैसे दीवारों के कान होते है ।
वैसे ही घर की दीवारों में ,
एक और भी बात होती है ।
तोड़ने की और जोड़ने की ,
क्यों की जब बात ,
हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो ,
ये दीवारे निजता को तोड़कर ,
सच छुपाने को मजबूर करती है ।
और ऐसे ही समाज से जोडती है ।

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