हम जिधर नहीं चाहते तुम जाओ,
उन गलियों में अपनी तश्वीर लगा देंगे ।
कोई काम न होंगे,
मगर तुमको तो मुसीबतों से बचा लेंगे ।
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जानते है तुम नहीं मिलोगी हमें,
फिर भी ये काम किया करते है ।
जब भी सोते है ,
बिस्तर में तेरे लिए भी जगह छोड़ दिया करते है ।
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ये कैसा पर्दा है ।
जब मैं तुम्हे देखता हूँ ,
तो तुम मुझे नहीं देखती ।
मगर जब तुम्हे मैं नहीं देखता ,
तो तुम ये देखती हो , मैं उस वक़्त और क्या देखता हूँ ।
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कपड़ें बहुत रंग के नहीं है मेरे पास,
भीड़ में भी आसानी से तुम पहचान सको ।
स्वाभाव भी कोई ढंग का नहीं है ।
जो तुम आसानी से हमको भूल सको ।
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चाहे मैं कहूँ या तुम कहो ,
एक सी बात हो ।
मुख अलग हुए ,तो भी क्या ?
एक भाव के संवाद हो ।
जान न पड़े , आखिर कहा किसने ?
वाणी भले दो ,
आश्चर्य ! एक विद्यमान हो ।
मिलकर क्या होगा ,
जब क्षण भर का ही साथ हो ।
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