15 दिसंबर से 15 मार्च के बीच भारतीय उपमहाद्वीप में भूमध्य सागर, काला सागर और कैस्पिएन सागर से चलने वाली आद्र पछुआ पवनों के कारण वर्षा होती है। इस बेसमय वर्षा से मध्य प्रान्त और उसके आस पास के क्षेत्रों में फसल को नुकसान पहुँचा है । सो किसानो की हालात दयनीय बनी हुई है ।
ध्यान देने योग्य बात ये है कि भूमध्य सागर भारत के पश्चिम में है इसके अतिरिक्त पश्चिम में और भी कुछ है। हाँ ! इंग्लिश चैनल उसके बाद बे ऑफ़ बिसके से होते हुए गिब्राल्टर जल संधि से भूमध्य सागर । भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ दिया स्वेज नहर ने और इसके बाद बाबेल मंडेब जल संधि पार कर के पहुँच गए अरब सागर में । वही अरब सागर जिसकी तट सीमा भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात से टकराती है । गुजरात में है सूरत । सूरत में पश्चिम से आये अंग्रेजो ने खोली व्यापारिक कोठी और उसके बाद क्या हुआ आपको पता ही है ?
सूर्य पूर्व से उगता है, पश्चिम से नहीं और वर्तमान समय सौर्य ऊर्जा का समय है । भारत की विदेश नीति और ऊर्जा नीति क्रमशः पूर्व की ओर देखो और पूर्व से उगने वाले सूर्य की ओर देखो को उल्लेखित करती है ।
हमे पश्चिम से घृणा नहीं है पर जिन्होंने सोमनाथ का मंदिर तोड़ा था पश्चिम से आये थे। पाकिस्तान भारत के पश्चिम में है। इटली भी पश्चिम में है और इटली से नेपोलियन आते आते रह गया मगर ....। वैसे तो पृथ्वी गोल है अर्थात जो पश्चिम में है वो पूर्व में भी है ।
पश्चिमीकरण के सामने हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति पिछड़ती जा रही है। हम रंग रूप में तो भारतीय परंतु आचार, विचार और व्यवहार में पक्के अंग्रेज है । स्वच्छ और सुगंध भारत की चाहत ने गंदे, गरीब और दुर्गन्ध पूर्ण भारत से दूरी बनानी शुरू कर दी है । अब सहन नहीं होता । कुछ भी हो जाये अब इसके बगल में नहीं बैठ सकता, इसके हाथ का पानी नहीं पी सकता, ये तो यहाँ भी आ गए, इनके कारण ही आज इंडिया इतना पीछे है । ये वाक्यांश प्रायः सुने जा सकते है ।
पर सौ बात की एक बात भारत ने 200 वर्षो का पराधीनता का समय झेला है और उसके बाद अगर केवल 68 वर्षो में हमे जो मिला और हमारे दूसरे भाइयों को नहीं मिला तो ये मात्र तुक्का है और तुक्के पर अभिमान नहीं करना चाहिए ।
सो अन्तर का जब वाजिब कारण है तो अगली बार से अकारण सीट से नहीं उठना, इससे किसी को बुरा लग सकता है ?
ज्यादा कुछ नहीं, बस भूलभुलैया वाले बगीचे का नक्शा है। कुछ मुरझाए हुए फूल है जिनकी गंध अभी बाकि है । अधसड़े फल है जिनको किनारे से बचा के खाया जा सकता है और भँवरे-तितलियों की गैर मौजूदगी के कारण माली झींगुरों की सभ्यता को सहेजने के लिए .........
मंगलवार, 7 अप्रैल 2015
ये पश्चिमी विक्षोभ है ।
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