कोयले पर आधारित ताप बिजली घर परर्यावरण को दुष्प्रभावित करते है । सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के द्वारा किये गए अध्ययन से भारत के विभिन्न ताप बिजली घरों में विभिन्न कमियाँ पाई गई है ।
स्वस्थ्य, शिक्षा, पेय जल, सड़क के सामान ही ऊर्जा भी जनता की बुनियादी आवश्यकता है । जिसमे से विद्युत ऊर्जा, ऊर्जा का एक प्रमुख प्रकार है । विद्युत ऊर्जा के उत्पादन के कई माध्यमों जैसे कोयला आधारित ताप बिजली घर, जल विद्युत परियोजना, अनविनिकृत ऊर्जा स्त्रोतों इत्यादि में से कोयला आधारित ताप बिजली संयंत्र सर्वाधिक अनुपात में भारत की विद्युत ऊर्जा आवश्यकता की आपूर्ति करता है ।
भारत में कोयले के विशाल भंडार, अन्य ऊर्जा स्त्रोतों की तुलना में आसान तकनीक, सस्ती ऊर्जा दर और तुलनात्मक रूप से कम लागत और कम निर्माण के समय के कारण कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना भारी संख्या में शुरू की गई ।
कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना के केवल लाभ ही नहीं है अपितु हानि भी है। ऊर्जा संयंत्र से भारी मात्रा में कोयले के दहन के कारण दहन पश्चात उत्पाद के रूप में विषैली गैस, अध जले ईंधन के सूक्ष्म कण, प्रदूषित जल और राख का ढेर निकलता है ।
ये सभी पर्यावरण के विभिन्न घटको के प्रदूषण का कारण है । विषैली गैसे जैसे कार्बन डाइ ऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड, अध जले ईंधन के सूक्ष्म कण इत्यादि वायु प्रदूषण करते है जबकि सल्फर के ऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण अम्लीय वर्षा होती है जो स्थल और जल के प्रदूषण का कारण है । प्रदूषित जल और निष्काषित राख से स्थल, जल और वायु तीनो ही प्रभावित होती है ।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में भारत के कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र की कमियों को उजागर किया गया है । जिसमें कम प्लांट लोड फैक्टर, अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड की वातावरण में निष्काषित मात्रा, अधिक सल्फर के ऑक्साइड का निष्कासन, अत्यधिक स्वच्छ जल का उपयोग और अत्यधिक दूषित जल का निष्कासन और अत्यधिक दहन पश्चात उत्पन्न राख की मात्रा प्रमुख कमियाँ है ।
भारत में कोयले के विशाल भंडार, अन्य ऊर्जा स्त्रोतों की तुलना में आसान तकनीक, सस्ती ऊर्जा दर और तुलनात्मक रूप से कम लागत और कम निर्माण के समय के कारण कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना भारी संख्या में शुरू की गई ।
कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना के केवल लाभ ही नहीं है अपितु हानि भी है। ऊर्जा संयंत्र से भारी मात्रा में कोयले के दहन के कारण दहन पश्चात उत्पाद के रूप में विषैली गैस, अध जले ईंधन के सूक्ष्म कण, प्रदूषित जल और राख का ढेर निकलता है ।
ये सभी पर्यावरण के विभिन्न घटको के प्रदूषण का कारण है । विषैली गैसे जैसे कार्बन डाइ ऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड, अध जले ईंधन के सूक्ष्म कण इत्यादि वायु प्रदूषण करते है जबकि सल्फर के ऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण अम्लीय वर्षा होती है जो स्थल और जल के प्रदूषण का कारण है । प्रदूषित जल और निष्काषित राख से स्थल, जल और वायु तीनो ही प्रभावित होती है ।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में भारत के कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र की कमियों को उजागर किया गया है । जिसमें कम प्लांट लोड फैक्टर, अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड की वातावरण में निष्काषित मात्रा, अधिक सल्फर के ऑक्साइड का निष्कासन, अत्यधिक स्वच्छ जल का उपयोग और अत्यधिक दूषित जल का निष्कासन और अत्यधिक दहन पश्चात उत्पन्न राख की मात्रा प्रमुख कमियाँ है ।
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