रविवार, 9 मार्च 2014

मेरी डायरी से !!!

१. सत् का कोई पर्याय नहीं है इसलिए ढूढ़ने का प्रयास     नहीं करना चाहिए । दो ही तो मार्ग है या तो रावण       बनो, या विभीषण ।

२. ईश्वर जब अशक्तों कि सुन लेते है तो भक्तों कि तो         जरूर ही सुनेंगे ।

३. मन > शरीर > वस्तु ।

४. अंक एक बार की मेहनत है जबकि ज्ञान सैकड़ो बार     के प्रयास के बाद मिलता है । अंततः ज्ञान ही काम       आता है । 

५. अकेले सूत्र का कोई महत्व नहीं होता लेकिन जैसे        ही उससे संबंधित कोई समस्या सामने आ जाती है        उसके बाद एकाएक सूत्र का महत्व बढ़ जाता है । 


६. ऐसा कार्य अवश्य करना चाहिए जिसमें लाभ हो ।
    ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिसमें हानि हो ।
    ऐसा कार्य कभी नहीं करना चाहिए जिसका हानि या     लाभ न ज्ञात हो । क्योंकि ऐसा कार्य करने से प्रायः       बहुत हानि होती है ।  

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