१. सत् का कोई पर्याय नहीं है इसलिए ढूढ़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए । दो ही तो मार्ग है या तो रावण बनो, या विभीषण ।
२. ईश्वर जब अशक्तों कि सुन लेते है तो भक्तों कि तो जरूर ही सुनेंगे ।
३. मन > शरीर > वस्तु ।
४. अंक एक बार की मेहनत है जबकि ज्ञान सैकड़ो बार के प्रयास के बाद मिलता है । अंततः ज्ञान ही काम आता है ।
५. अकेले सूत्र का कोई महत्व नहीं होता लेकिन जैसे ही उससे संबंधित कोई समस्या सामने आ जाती है उसके बाद एकाएक सूत्र का महत्व बढ़ जाता है ।
६. ऐसा कार्य अवश्य करना चाहिए जिसमें लाभ हो ।
ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिसमें हानि हो ।
ऐसा कार्य कभी नहीं करना चाहिए जिसका हानि या लाभ न ज्ञात हो । क्योंकि ऐसा कार्य करने से प्रायः बहुत हानि होती है ।
२. ईश्वर जब अशक्तों कि सुन लेते है तो भक्तों कि तो जरूर ही सुनेंगे ।
३. मन > शरीर > वस्तु ।
४. अंक एक बार की मेहनत है जबकि ज्ञान सैकड़ो बार के प्रयास के बाद मिलता है । अंततः ज्ञान ही काम आता है ।
५. अकेले सूत्र का कोई महत्व नहीं होता लेकिन जैसे ही उससे संबंधित कोई समस्या सामने आ जाती है उसके बाद एकाएक सूत्र का महत्व बढ़ जाता है ।
६. ऐसा कार्य अवश्य करना चाहिए जिसमें लाभ हो ।
ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिसमें हानि हो ।
ऐसा कार्य कभी नहीं करना चाहिए जिसका हानि या लाभ न ज्ञात हो । क्योंकि ऐसा कार्य करने से प्रायः बहुत हानि होती है ।
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