शनिवार, 25 जनवरी 2014

परिपक्व जीवन कि रूपरेखा


वेदांत जीवन कि समस्यओं का आसान, अप्रत्याशित अथवा चमत्कारिक समाधान प्रस्तुत नहीं करता है | वह हमें जीवन कि समस्यओं का  परिपक्व जीवन द्वारा सामना करने कि प्रेरणा देता  है | समझदारी से जिये गए जीवन कि निम्नोवत विशेषताएँ हैं :-
  1. परिपक्व जीवन लक्ष्य केंद्रित होता है । उनका समग्र जीवन के लिए  कोई  लक्ष्य होता है |
  2. परिपक्व जीवन अनासक्त भाव से जिया जाता है । अनासक्ति व्यक्ति को वस्तुओं को देखने का सही दृष्टिकोण प्रदान करती है ।  अज्ञानी बिना प्रमाण के सब कुछ सत्य मन लेते हैं | ( सदा आशावादी होने का अर्थ है कल्पनालोक में जीना है , दूसरी ओर सदा निराशावादी बने रहना नकरात्मक दृष्टिकोण है ।)
  3. वर्तमान में जीना परिपक्व जीवन का लक्षण है, अतीत की गलतियों और असफलताओं का चिंतन अथवा भविष्य के स्वप्न देखने से कोई लाभ नहीं होता है | (हमें वर्तमान में जीना चाहिए )
  4. परिपक्व जीवन अध्यात्मिक दृष्टि से रचनात्मक होता है | हमारे कर्म आत्माभिव्यक्ति के साधन है और जीवन में आवश्यक है । जहाँ आत्माभिव्यक्ति नहीं होती वहाँ मन परिपुष्ट नहीं होता है और फलस्वरूप जीवन अर्थहीन हो जाता है । 
  5. परिपक्व जीवन का मूलमंत्र है - स्वप्रयत्न न कि स्वनिंदा ।  हम अपने कर्मों से अपने भाग्य को बनाते या बिगाड़ते है और अपनी पात्रता के अनुरूप सुख अथवा दुःख भोगते हैं। 
  6. परिपक्व जीवन के लिए अहंकार का परिपाक भी आवश्यक है ।  अहंबोध के बिना जीवन संभव नहीं है । भगवतगीता में तीन प्रकार के अहंकार का वर्णन है :-
                    १. तामसिक अथवा कच्चा अहंकार । 
                    २. राजसिक अथवा बढ़ा हुआ अहंकार । 
                    ३. सात्विक अथवा परिपक्व अहंकार ।  

   परिपक्व जीवन योग प्रेरित होता है ।  ईश्वर प्राप्ति को जीवन का लक्ष्य बनाने पर एवं हमारी सभी आशा अकांक्षाओं को उस एक लक्ष्य कि ओर परिचालित करने पर ही योग सधता है ।  जब योग जीवन के साथ अभिन्न हो जाता है , तब सब कुछ पुनीत हो जाता है । योग आंतरिक शांति और समरसता का मूल आधार है 
परिपक्व जीवन एक ऐसी वस्तु है जो जीने से ही सीखी जा सकती है । परिपक्व जीवन कि नींव ऐसे पुरुषत्व द्वारा डाली जा सकती है जो  जोखिम उठाकर, गलतियाँ करके, सिखने के लिए तत्पर हो । 

(This is copied from book titled "Meditation" Published by Ramkrishan seva trust)

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