वेदांत जीवन कि समस्यओं का आसान, अप्रत्याशित अथवा चमत्कारिक समाधान प्रस्तुत नहीं करता है | वह हमें जीवन कि समस्यओं का परिपक्व जीवन द्वारा सामना करने कि प्रेरणा देता है | समझदारी से जिये गए जीवन कि निम्नोवत विशेषताएँ हैं :-
- परिपक्व जीवन लक्ष्य केंद्रित होता है । उनका समग्र जीवन के लिए कोई लक्ष्य होता है |
- परिपक्व जीवन अनासक्त भाव से जिया जाता है । अनासक्ति व्यक्ति को वस्तुओं को देखने का सही दृष्टिकोण प्रदान करती है । अज्ञानी बिना प्रमाण के सब कुछ सत्य मन लेते हैं | ( सदा आशावादी होने का अर्थ है कल्पनालोक में जीना है , दूसरी ओर सदा निराशावादी बने रहना नकरात्मक दृष्टिकोण है ।)
- वर्तमान में जीना परिपक्व जीवन का लक्षण है, अतीत की गलतियों और असफलताओं का चिंतन अथवा भविष्य के स्वप्न देखने से कोई लाभ नहीं होता है | (हमें वर्तमान में जीना चाहिए )
- परिपक्व जीवन अध्यात्मिक दृष्टि से रचनात्मक होता है | हमारे कर्म आत्माभिव्यक्ति के साधन है और जीवन में आवश्यक है । जहाँ आत्माभिव्यक्ति नहीं होती वहाँ मन परिपुष्ट नहीं होता है और फलस्वरूप जीवन अर्थहीन हो जाता है ।
- परिपक्व जीवन का मूलमंत्र है - स्वप्रयत्न न कि स्वनिंदा । हम अपने कर्मों से अपने भाग्य को बनाते या बिगाड़ते है और अपनी पात्रता के अनुरूप सुख अथवा दुःख भोगते हैं।
- परिपक्व जीवन के लिए अहंकार का परिपाक भी आवश्यक है । अहंबोध के बिना जीवन संभव नहीं है । भगवतगीता में तीन प्रकार के अहंकार का वर्णन है :-
२. राजसिक अथवा बढ़ा हुआ अहंकार ।
३. सात्विक अथवा परिपक्व अहंकार ।
परिपक्व जीवन योग प्रेरित होता है । ईश्वर प्राप्ति को जीवन का लक्ष्य बनाने पर एवं हमारी सभी आशा अकांक्षाओं को उस एक लक्ष्य कि ओर परिचालित करने पर ही योग सधता है । जब योग जीवन के साथ अभिन्न हो जाता है , तब सब कुछ पुनीत हो जाता है । योग आंतरिक शांति और समरसता का मूल आधार है
परिपक्व जीवन एक ऐसी वस्तु है जो जीने से ही सीखी जा सकती है । परिपक्व जीवन कि नींव ऐसे पुरुषत्व द्वारा डाली जा सकती है जो जोखिम उठाकर, गलतियाँ करके, सिखने के लिए तत्पर हो ।
(This is copied from book titled "Meditation" Published by Ramkrishan seva trust)
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