बुधवार, 25 मार्च 2015

अंतिम

मेरी महत्ता किसी अनजान के लिए
क्या होगी ?
मैं नहीं पहले बोलूंगा,
क्या वो बोलेगी ?

जितना प्रगाढ़ मोह होगा,
उतना ही तीव्र,
उसका विद्रोह होगा ।

मैं आरम्भ से ही द्रवित ,
चक्षु सदा रहे अश्रु भरित ,

मेरे रोने का कैसे मान होगा ?
था जो आँशु ले के ,
सदा समक्ष उपस्थित ,

जब भ्रम टूटा था ,
और जब टूटेगा
आँखों में आँशू किसके होंगे ?
किसके ज्यादा सच्चे होंगे ?
सब समय लिखेगा ।






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