यू आर माय हम्प्टी डम्पति हेल्लो हनी बनी, जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी, फेना ही लेना, पहले इस्तमाल करे फिर विश्वास करे , मुँह में रजनीगंधा कदमो में दुनिया, हो रहा भारत निर्माण भारत सरकार द्वारा जनहित में जारी इत्यादि पक्तियाँ आपने यदा-कदा तो सुनी ही होगी और ये वाली लाइन तो पक्का ही सुनी होगी अबकी बार ........ ............।
ये विज्ञापन जगत है, जो वर्तमान विनिमय बाजार का महत्वपूर्ण घटक है । विज्ञापन कुछ सूचनाओं का व्यवस्थित, आकर्षक, संक्षेपित वर्णन होता है जो संचार के साधनों के मध्यम से विक्रेता और क्रेता के बीच मुद्रा लेन-देन को प्रोत्साहित करता है । विज्ञापन की सहायता से वस्तु एवं सेवाओँ के प्रदेता ग्राहक या उपभोक्ता को अपनी ओर आकर्षित करते है । विज्ञापनों की सहायता से लोगो को वित्त बाजार में आने वाले नए उत्पादों, उपलब्ध उत्पादों एवं सेवाओँ के बारे में जानकारी प्राप्त होती है । विज्ञापन देने के लिए भी विज्ञापन दिए जाते है । सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के प्रचार के लिए सम्बंधित विज्ञापन जारी करती है ।
जिस प्रकार हम परिवहन साधनों के माध्यम से एक जगह से दूसरी जगह जाते है वैसे ही विज्ञापन संचार के साधनो के माध्यम से हम तक पहुचते है । विज्ञापन होर्डिंग, अख़बार, पम्पलेट, स्पीकर के माध्यम से, टेलीविज़न, रेडियो, व्यक्तिगत बातचीत, टेलीफोन या मोबाइल कॉल के द्वारा आदि के माध्यम से हम तक पहुचते है । मोबाइल कॉल के माध्यम से चुनाव के दौरान प्रमुख राजनेताओं के द्वारा अपनी पार्टी के पक्ष में वोट करने की अपील तो आपने सुनी ही होगी । ये विज्ञापन के वर्तमान तरीकों में सर्वाधिक लोकप्रिय और असरदार तरीका है ।
विज्ञापनों से हम घिरे हुए है । ये कभी-कभी हमारे लिए सर दर्द बन जाते है तो कभी शांत से महौल में हम से बात भी करते है । हमारे आसपास की बेरंग दीवारे, कोने और सूनी छते सभी कुछ इनसे गुलज़ार है । विज्ञापनों की रचना करते वक्त विज्ञापन निर्माता लोगो के मनोविज्ञान का ध्यान रखकर घटनाओँ का क्रम, पात्र, संवाद और भाषा का चयन करते हैं। ये वही तत्त्व है जो एक अच्छे, अधिक लोकप्रिय और कमजोर, कम लोकप्रिय विज्ञापन के बीच अन्तर का कारण बनते है ।
अक्सर नए अभिनेता और अभिनेत्रियाँ बड़े परदे पर आने से पहले विभिन्न दैनिक उपयोग की वस्तुओं के विज्ञापन में देखे जा सकते है । ये उनके कॅरियर का पहला पड़ाव है जबकि खेल जगत से जुड़ी हस्तियों के लिए ये उनके कॅरियर के सर्वोच्च स्तर पर पहुचने के बाद आने वाला पड़ाव है ।
विज्ञापन हमेशा ही अच्छे या बुरे नहीं होते । कुछ विज्ञापन इतने मनोरंजक और हास्यास्पद होते है की लोगो की ज़ुबाँ पे यूँही चढ़ जाते है और मनोरंजन के साथ सही रास्ता भी दिखाते है पर कभी-कभी विज्ञापन लोगो को ठगने का माध्यम बन जाते है । विज्ञापनों के दुरूपयोग पर अंकुश रखने के लिए सरकार ने ' द एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स कौंसिल ऑफ़ इंडिया ' का गठन किया है जो भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ी शिकायतो के आधार पर उनके प्रसारण पर प्रतिबन्ध लगाता है ।
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जिस प्रकार हम परिवहन साधनों के माध्यम से एक जगह से दूसरी जगह जाते है वैसे ही विज्ञापन संचार के साधनो के माध्यम से हम तक पहुचते है । विज्ञापन होर्डिंग, अख़बार, पम्पलेट, स्पीकर के माध्यम से, टेलीविज़न, रेडियो, व्यक्तिगत बातचीत, टेलीफोन या मोबाइल कॉल के द्वारा आदि के माध्यम से हम तक पहुचते है । मोबाइल कॉल के माध्यम से चुनाव के दौरान प्रमुख राजनेताओं के द्वारा अपनी पार्टी के पक्ष में वोट करने की अपील तो आपने सुनी ही होगी । ये विज्ञापन के वर्तमान तरीकों में सर्वाधिक लोकप्रिय और असरदार तरीका है ।
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