किसी ने जब भी अपलक देखा ,
और देखा, खूब देखा ,
नजरें स्थिर सी हो गयी ।
तो थोड़ा ठहरकर सोचा ,
नजरों का इक चेहरे पर,
टिकने का कारण क्या ?
और देखा, खूब देखा ,
नजरें स्थिर सी हो गयी ।
तो थोड़ा ठहरकर सोचा ,
नजरों का इक चेहरे पर,
टिकने का कारण क्या ?
था , हूँ और रहूँगा ।
चपटी हुई नाक ,
गुब्बारे सा फूला मुँह ,
सुबह ही शीशे पे तो देखा था ।
उंगलियों को आपस में फेरता ,
जैसे बिनता जुआ ।
किसी ने कहा नहीं ,
शीशे में मुह देखते ही निकला -
चपटी हुई नाक ,
गुब्बारे सा फूला मुँह ,
सुबह ही शीशे पे तो देखा था ।
उंगलियों को आपस में फेरता ,
जैसे बिनता जुआ ।
किसी ने कहा नहीं ,
शीशे में मुह देखते ही निकला -
ये देखो बंदरमुहा !
किसी ने कहा -
इसे रूप का अहम है,
देखो ! कैसे कंचे से गोल नयन है?
इसे रूप का अहम है,
देखो ! कैसे कंचे से गोल नयन है?
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