मंगलवार, 19 अगस्त 2025

नशे की हालत में

सरकार और नशा

सरकारें न नौकरी देती हैं,
न नशा करने देती हैं।
तो फिर चाहती क्या हैं?

न जीने देती हैं,
न मरने देती हैं,
न भूलने देती हैं दुख।

अगर पूछें खुद से—
कौन करता है नशा? क्यों करता है नशा?
तो जवाब मिलेगा—
वही जिनके पास नौकरी है,
और वही जिनके पास नहीं है।

सरकार कहती है—
नौकरी दो या न दो,
नशा तो करेगा ही इंसान।
तो क्यों दें नौकरी?
क्यों दें नशा?

कहीं नशे में
ट्रैफिक इंस्पेक्टर न बन जाए,
कहीं मास्टर न बन जाए,
कहीं जागरूक नागरिक न बन जाए।

सरकार जानती है,
एक नशेड़ी भी
कुछ बनने का सपना देखता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें