बुधवार, 9 अक्टूबर 2019


छोटे से यह सवाल पूछने लगते हैं कि बड़े होकर क्या बनना चाहते हो ? और यह सवाल इसलिए नहीं पूछा जाता है कि बच्चे ने बहुत सोच विचार के किसी निष्कर्ष पर पहुँच गया है बल्कि ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उसके अवचेतन मन में एक उद्देश्य फीड किया जा सके । यह सिखाने का एक तरीका है ।

इस पद्धति को गलत नहीं कहा जा सकता है । जीवन में लक्ष्य होने से आगे बढ्ने में आसानी रहती है । लेकिन बच्चे को जीवन में स्वयं फैसले लेने कि स्वतन्त्रता देनी चाहिए ?

यदि यह स्वतन्त्रता हो कि जीवन में चुनने कि तुम क्या बनना चाहते हो तो जवाब तक कैसे पहुचेंगे ? इसका एक आसान तरीका है ।

एक उक्ति है “आपको यह स्वीकारना पड़ेगा कि आप सब कुछ ठीक नहीं कर सकते है “

सरकारी तंत्र में बहुत कार्य करने के बाद भी जो टीस मन में उठती है कि अभी भी बहुत से लोग ऐसे है जो वंचित है जिनके लिए मैं अपेक्षित कार्य नहीं कर पाया ।

अब इससे यह बात सामने आती है कि आप क्या बनना चाहते है इसका निर्णय इस बात से होता है कि समाज में क्या बदलाव देखना चाहते है ?

बहुत से लोग जिनसे यह पूछा गया कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते है ? और वे लोग प्रबुद्ध है तो वे कहते है कि उनके जीवन में अमुक अमुक घटना घटी इसलिए उनके विचार में बदलाव आया और इसलिए वे अमुक पद पर जाना चाहते है ।

इस बात को सपोर्ट करती कई कहानियाँ है जिनसे कई नए पक्ष भी सामने आते हैं ।

एक लड़की बड़े होकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती है क्योंकि जब उसके साथ एक छेड़खानी कि घटना हुयी थी तो पुलिस ने सही तरह से कार्य नहीं किया । वह चाहती है कि वह पुलिस अधिकारी बनकर इस व्यवस्था को ठीक करे ।

इसके अतिरिक्त एक व्यक्ति डॉक्टर इसलिए बनना चाहता है क्योंकि उसके बड़े भाई कि मृत्यु इसलिए हो गयी क्योंकि उसके बड़े भाई को सही इलाज सही समय पर नहीं मिला ।

व्यक्ति को जीवन में जो वह बदलाव समाज में देखना चाहता है यदि उसके लिए ही प्रयास करता है तो एक संतुष्टि का अनुभव करता है । यह काम हॉबी के तौर पर भी लोग करते है क्योंकि हमेशा यह संभव नहीं होता जो नौकरी हम करते है और जैसा समाज हम देखना चाहते है वे एक हो ।

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