तू सिक्का थैली का है ।
बाकि सब सिक्को ने ,
कभी तो बाहर निकलकर ,
अपनी कीमत का अंदाज़ लगाया है ।
उनमे और तुझमे फर्क चमक का है ।
बाकि सब सिक्को का ,
रंग उतर चुका है ।
बाज़ार में इनको ,
इनके जैसा सबने कुछ तो देखा है ।
ये तो चल जाएँगे ।
पर क्या कभी तू ने सोचा ।
तेरा क्या होगा ?
क्योकि कोई सिक्का थैली का नहीं होता है ।
धीरे - धीरे जब थैली खाली हो जाएगी ।
तू तुझको भी ,
आखिर में निकालना ही पड़ेगा ।
अब तक बचते बचाते कभी तेरी ,
कीमत का अंदाज़ नहीं लगाया ।
बाकि सारे तो सिक्के जो भी थे ।
कोई दस का था , कोई पञ्च का , कोई दो का था ।
मगर तू सिक्का सोना का है ।
तू सहारा मेरे बुरे समय का है ।
याद रखना ,
तुझ पर क़र्ज़ नमक का है ।
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| courtsey: csorescu.wordpress.com |
कभी तो बाहर निकलकर ,
अपनी कीमत का अंदाज़ लगाया है ।
उनमे और तुझमे फर्क चमक का है ।
बाकि सब सिक्को का ,
रंग उतर चुका है ।
बाज़ार में इनको ,
इनके जैसा सबने कुछ तो देखा है ।
ये तो चल जाएँगे ।
पर क्या कभी तू ने सोचा ।
तेरा क्या होगा ?
क्योकि कोई सिक्का थैली का नहीं होता है ।
धीरे - धीरे जब थैली खाली हो जाएगी ।
तू तुझको भी ,
आखिर में निकालना ही पड़ेगा ।
अब तक बचते बचाते कभी तेरी ,
कीमत का अंदाज़ नहीं लगाया ।
बाकि सारे तो सिक्के जो भी थे ।
कोई दस का था , कोई पञ्च का , कोई दो का था ।
मगर तू सिक्का सोना का है ।
तू सहारा मेरे बुरे समय का है ।
याद रखना ,
तुझ पर क़र्ज़ नमक का है ।

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