बुधवार, 2 अप्रैल 2014

तू सिक्का थैली का है । तुझ पर क़र्ज़ नमक का है |

तू सिक्का थैली का है । 
courtsey: csorescu.wordpress.com
बाकि सब सिक्को ने ,
कभी तो बाहर निकलकर ,
अपनी कीमत का अंदाज़ लगाया है । 
उनमे और तुझमे फर्क चमक का है ।
बाकि सब सिक्को का ,
रंग उतर चुका है । 
बाज़ार में इनको ,
इनके जैसा सबने कुछ तो देखा है । 
ये तो चल जाएँगे । 
पर क्या कभी तू ने सोचा । 
तेरा क्या होगा ?
क्योकि कोई सिक्का थैली का नहीं होता है । 
धीरे - धीरे जब थैली खाली हो जाएगी । 
तू तुझको भी ,
आखिर में निकालना ही पड़ेगा । 
अब तक बचते बचाते कभी तेरी ,
कीमत का अंदाज़ नहीं लगाया । 
बाकि सारे तो सिक्के जो भी थे । 
कोई दस का था , कोई पञ्च का , कोई दो का था । 
मगर तू सिक्का सोना का है । 
तू सहारा मेरे बुरे समय का है । 
याद  रखना , 
तुझ पर क़र्ज़ नमक का है ।

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