--" एक मुर्ख ऐसे प्रयास को आत्महत्या की संज्ञा देगा और एक नवोन्मेषक इसकी प्रशंसा करेगा । " --
Land , Air and Water . यद्यपि ये शब्द कृत्रिम रूप से इस प्रकार सजाये गए है कि ये 'LAW ' देखने में लगे पर फिर भी ये सभी तत्त्व अर्थात् भूमि, हवा और पानी न केवल धरती को बल्कि हमारे शरीर के भी अभिन्न अंग है । जब कभी भी इनके उपयोग की जरुरत पड़े हमे इन्हें न्यायपूर्वक और प्रकृति के खिलाफ नहीं उपयोग करना चाहिए.
मानव सभ्यता के विकास से, वो आरम्भ से ही घुमक्कड़ और खानाबदोश था । इस प्रकार का उसका स्वाभाव उसे एक जगह से दूसरी जगह जाने या घूमने फिरने के अलग-अलग माध्यम खोजने को मजबूर कर दिया। अगर हम ध्यान दे तो हमने सबसे पहले ज़मीन पर चलना उसके बाद पानी पर तैरना सीखा । अब तक सारे आकाशीय मार्ग केवल उड़ सकने वाले जीवो द्वारा उपयोग में लाये जाते थे ।
मेरे हिसाब से प्रकृति का नित्य नियम यही तीन तत्व निर्धारित करते हैं । मानता हूँ कि पक्षी की तरह उड़ना या आसमान में उड़ना उतना आसान नहीं है जितना कि मछली की तरह तैरना और घोड़े की तरह दौड़ना । ह्यूमन अतीत की कईयों कहानियो में पढ़ा है कि कैसे पवित्र आत्माएँ एक जगह से दूसरी जगह उड़ कर जाया करती थी । उड़ कर जाना किसी भी जगह पहुचने का सबसे तेज माध्यम है । इसलिए इस को तो सीखना बनता है । वो भी किसी भी कीमत पर ।
ये कहना गलत होगा कि हमारे पास पक्षी के जैसे पंख नहीं है । क्योंकि सोचिये हमारे पास मछली के जैसे फिन्स और घोड़े के जैसे पैर भी तो नहीं है पर हम पानी में तैर सकते है और जमीन पर दौड़ भी सकते है तो हम उड़ क्यों नहीं सकते । जबकि हम कुछ ऊँचाई तक हवा में कूद जरूर सकते है ।
मेरे हिसाब से प्रकृति का नित्य नियम यही तीन तत्व निर्धारित करते हैं । मानता हूँ कि पक्षी की तरह उड़ना या आसमान में उड़ना उतना आसान नहीं है जितना कि मछली की तरह तैरना और घोड़े की तरह दौड़ना । ह्यूमन अतीत की कईयों कहानियो में पढ़ा है कि कैसे पवित्र आत्माएँ एक जगह से दूसरी जगह उड़ कर जाया करती थी । उड़ कर जाना किसी भी जगह पहुचने का सबसे तेज माध्यम है । इसलिए इस को तो सीखना बनता है । वो भी किसी भी कीमत पर ।
ये कहना गलत होगा कि हमारे पास पक्षी के जैसे पंख नहीं है । क्योंकि सोचिये हमारे पास मछली के जैसे फिन्स और घोड़े के जैसे पैर भी तो नहीं है पर हम पानी में तैर सकते है और जमीन पर दौड़ भी सकते है तो हम उड़ क्यों नहीं सकते । जबकि हम कुछ ऊँचाई तक हवा में कूद जरूर सकते है ।
इस अपंगता का कारण मनुष्य के मन के भीतर का असफलता का भय है कि वो बिना पंख के नहीं उड़ सकता ।
इसलिए आज से जब कभी भी आप किसी को ऊँचाई से कूदते देखे और बिना किसी सुरक्षा के तो उसका प्रोत्साहन करे क्योंकि एक मुर्ख ऐसे प्रयास को आत्महत्या की संज्ञा देगा जबकि एक नवोन्मेषक ऐसे प्रयास की प्रशंसा करेगा ।
इसलिए आज से जब कभी भी आप किसी को ऊँचाई से कूदते देखे और बिना किसी सुरक्षा के तो उसका प्रोत्साहन करे क्योंकि एक मुर्ख ऐसे प्रयास को आत्महत्या की संज्ञा देगा जबकि एक नवोन्मेषक ऐसे प्रयास की प्रशंसा करेगा ।
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