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| Dedicated to |
कुछ ऐसा मानेंगे रात बड़ी ।
कुछ ही मानेंगे बात बड़ी ।
कुछ तो बोलेंगे डूब गया रे डूब गया ।
जो राष्ट्र वेदना पीया करते है ।
असंभव तो सब को दिखते है ।
पर वीर तो वो है ।
जो असंभव को भी संभव किया करते है ।
कुछ ही मानेंगे बात बड़ी ।
कुछ तो बोलेंगे डूब गया रे डूब गया ।
पर कोई तो एक हम में से होगा ।
जो क्षितिज की ओर दौड़ेगा।
लक्ष्य अटल हुए तो उसके ।
कहलाया इतिहास रचयिता ।
क्षमता से ज्यादा की मांग करेगा ।
रिश्तो से ऊपर उठकर ।
वो ससम्मान विजेता होगा ।
साहस के ऐसे पुतले कम ही बनते है ।
जो क्षितिज की ओर दौड़ेगा।
लक्ष्य अटल हुए तो उसके ।
कहलाया इतिहास रचयिता ।
रिश्तो से ऊपर उठकर ।
वो ससम्मान विजेता होगा ।
साहस के ऐसे पुतले कम ही बनते है ।
पर वीर तो वो है ।
जो असंभव को भी संभव किया करते है ।

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