मंगलवार, 31 जुलाई 2012

मानो सूर्य गगन में नहीं उगा ।



मानो सूर्य गगन में नहीं उगा


Dedicated to 
मानो सूर्य गगन में नहीं उगा ।
कुछ ऐसा मानेंगे रात बड़ी ।
कुछ ही मानेंगे बात बड़ी
कुछ तो बोलेंगे डूब गया रे डूब गया ।

पर कोई तो एक हम में से होगा ।
जो क्षितिज की ओर दौड़ेगा।
लक्ष्य अटल हुए तो उसके 
कहलाया इतिहास रचयिता
क्षमता से ज्यादा की मांग करेगा
रिश्तो से ऊपर उठकर  ।
वो ससम्मान विजेता होगा

साहस के ऐसे पुतले कम ही बनते है ।
जो राष्ट्र वेदना पीया करते है ।
असंभव तो सब को दिखते है ।
पर वीर तो वो है  ।
जो असंभव को भी संभव किया करते है ।


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