मनुष्य ने शायद ही कभी
चींटियों को दाना उठाते देखकर
यह सोचा होगा
कि असंख्य चींटियों के खाने से
मनुष्य पर कोई खाद्य संकट आ सकता है।
उसी तरह ईश्वर ने भी
पृथ्वी इतनी विशाल बनाई है
कि असंख्य मनुष्य
और असंख्य चींटियाँ
एक साथ इसमें रह सकें।
ईश्वर की दृष्टि में
असंख्य मनुष्य और असंख्य चींटियाँ
एक समान हैं —
जैसे मनुष्य के लिए चींटी,
वैसे ही ईश्वर के लिए मनुष्य।
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