(1)
आस पास लोग है ।
और उन्ही में से कुछ की ,
आवाज़ लगातार आती रहती है ।
नए आते है ।
उठती आवाज़ों में ,
अपनी भी आवाज़ घोलते है ।
कुछ जाते है ।
खालीपन छोड़ जाते है ।
सिर्फ उनके लिए जिन्होंने ,
उनको आते और जाते देखा था ।
(2)
रंग बदलते रहते है ।
सभी हलचल ध्यान नहीं खिंच पाते ।
आँखे खुली हुई है ।
क्या कुछ नया है ?
पुराने में क्या नया है ?
आज किसने क्या पहना है ,
कौन क्या देखता है ?
देखो, वो आ गई ।
कपड़ो का रंग मैच कर रहा है ।
आँखे आँखों में पता नहीं क्या देखती है ?
(3)
बिलकुल भी समय नहीं है ।
सब कुछ बीतता जा रहा ।
व्यस्तता का अपना आनंद है ।
शांत हो जाने के कितने नुकसान है ।
साँसे रुक जाये,
नहीं ?
तो जिंदगी क्यों रुक जाये ।
एक दिन की सन्डे की छुट्टी के मजे
का आधार 6 दिन की मेहनत में है ।
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