कृपण काय ,
तो दरिद्र ,
मैं दुखी हूँ।
हूँ एकांत ,
अत्यंत शांत ,
तो मृत्यु ,
मैं अभिलाषी हूँ ।
हूँ व्यर्थ ,
उठ ऊपर जाऊ ,
तो उष्ण पवन ,
मैं अभिशप्त हूँ ।
हूँ पतित ,
लम्बा अतीत ,
तो अपराधी ,
मैं पश्चाताप करू ।
हूँ दम्भी .
विलम्ब आरंभि ,
तो अभ्यास ,
मैं मौन हूँ।
हूँ चपल ,
कम अकल ,
तो मुर्ख,
मैं पागल हूँ ।
तो अभ्यास ,
मैं मौन हूँ।
हूँ चपल ,
कम अकल ,
तो मुर्ख,
मैं पागल हूँ ।
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