संगीत, रेडियो और शफल फंक्शन। रैनडम या बिना सोचे समझे जैसा कि इसे सरल शब्दों में समझ सकते हैं। खाली समय में या काम की व्यस्तता के बीच पसंदीदा गानों को सुनना आम है । संगीत लोगों के व्यवहार को तेजी से प्रभावित करता है । इतनी तेजी से की आप उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं।
सिर्फ सुगम संगीत लोगों को उनकी जेब से उनकी गाढ़ी कमाई निकालने के लिए मजबूर कर देता है। यह एक व्यवस्थित खोज का विषय रहा है कि मल्टी ब्रांड रिटेल स्टोर्स में गाने बजाकर कस्टमर्स के खरीददारी के अनुभव को कैसे बेहतर किया जा सकता है?
एक धीमा-धीमा बजता हुआ गाना आपको सूकुन देता है और तनाव दूर करता है। जब आप हल्का और अच्छा महसूस करने लगते हैं तो आपको समान खरीदने कि इच्छा होती है।
लेकिन विषय ये नहीं है। यह तो संगीत के हमारे मन पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाती है। लेकिन विषय है जीवन में संगीत और खुद बनाई हुयी प्ले लिस्ट और रेडियो कि रैनडम प्ले लिस्ट में से किस प्ले लिस्ट को सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। और यह जरूरत है इसी कारण संगीत को सुनने में रैनडम गानों का बजना हो सके इसके लिए म्यूजिक प्लेयर में शफल फंक्शन दिया जाता हैं।
इससे जुड़ा एक मसला है। स्पाटीफ़ाई (spotify) जो कि एक म्यूजिक स्ट्रीमिंग एप्प है। इसका उपयोग करने वाले लोगों कि शिकायत थी कि स्पाटीफ़ाई गानों को शफल करने में बयास्ड है। यह ठीक से सांग्स को शफल नही करता हैं। यह बात इतनी बढ़ गयी कि स्पाटीफ़ाई के सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को एप्प के शफल फंक्शन के एल्गॉरिथ्म को बदलना पड़ गया।
इससे तो यह पता चला कि जीवन में संगीत जरूरी है और संगीत में रैनडम होना जरूरी है । ऐसा नहीं है कि लोगों कि अपनी प्ले लिस्ट नहीं होती है। मगर किसी दूसरे कि प्ले लिस्ट सुनना और रेडियो से गाने सुनना हमेशा खुद कि बनाई प्ले लिस्ट से बेहतर है। यह एक तरह से हमें खुद से अलग कुछ बेहतर कि तलाश कि उम्मीद को पूरा करती है।
रेडियो सुनते हुये जो अनुभव करते हैं। वह मोबाइल पर डाउनलोड किए हुये सांग्स को सुनने से काफी बेहतर है । लोगों ने शेयर किया है कि जब रेडियो में कभी भी कोई सांग्स बजने लगता है जिससे उनकी पुरानी यादें ताजा हो जाती है । उन्हें अपने दिमाग पे अपने जीवन के यादगार लम्हों को याद करने के लिए ज़ोर नहीं देना पड़ता है जैसे रेडियो पर वह सांग बिना सोचे समझे या रैंडम प्ले हुआ वैसे ही दिमाग में आए जीवन के यादगार लम्हों कि याद एक दम रैंडम है। रेडियो में बजने वाले गाने बज कर चले जाते है उनको लेकर हमारे दिमाग में यह सोच उसे कीमती बनती है कि जो मिल रहा है उसे एंजॉय करे क्योंकि हो सकता है ये गाना फिर न मिले या आसानी से न मिले या ये तो मेरे पास नहीं होगा इसके बाद ।
यह सोच जीवन के लिए एक सीख है कि हमें रेंडम या बयास्ड फ्री चीजें पसंद है। और खुद कि बजाय किसी टॉपिक पर एक्सपर्ट कि राय मानना बेहतर होता है। यह सोच वही है जो आपको खुद कि प्ले लिस्ट के प्रति बोरियत पैदा कर देती हैं । जीवन में चयन कि स्वतन्त्रता अपेक्षित है लेकिन यह चयन को लेकर ऊब पैदा कर देती है। यह हमेशा स्वयं के प्रति लगाव को कम करके दूसरे के पसंद को पसंद करने की ओर धकेलता है।