शनिवार, 30 मार्च 2013

ये एक की मन की बात है

ये एक की मन की बात है 



ये एक कि मन की बात है । 
सब ऐसा नहीं सोचते है ।                                                     
तो क्या करते है ?
वो मेहनत करते है  । 

बोलने में ,
बैठने में ,
चलने में ,

इन्हें सभ्य समाज में रहना है । 
परमार्थ में बोलना है । 
परमार्थ के लिए बैठना है । 
कारो से चलना है । 
पर ये ऐसा कुछ नहीं करते । 
ये स्वार्थ में बोलते है ,
स्वार्थ को बैठते है ,
और ऐसा करते हुए जब थक जाते है । 
तो हम मेहनत करते है ,  बोलते है ।  
हमे आराम करना है ,  
तो बैठते है  । 

और जब घर जाना है ,
तो कारो से चलते है  । 

चुकि ये एक की मन की बात है । 
सब ऐसा नहीं सोचते है ,

तो क्या करते है ?