ये एक की मन की बात है
ये एक कि मन की बात है ।
सब ऐसा नहीं सोचते है ।
तो क्या करते है ?
वो मेहनत करते है ।
बोलने में ,
बैठने में ,
चलने में ,
इन्हें सभ्य समाज में रहना है ।
परमार्थ में बोलना है ।
परमार्थ के लिए बैठना है ।
कारो से चलना है ।
पर ये ऐसा कुछ नहीं करते ।
ये स्वार्थ में बोलते है ,
स्वार्थ को बैठते है ,
और ऐसा करते हुए जब थक जाते है ।
तो हम मेहनत करते है , बोलते है ।
हमे आराम करना है ,
तो बैठते है ।
और जब घर जाना है ,
तो कारो से चलते है ।
चुकि ये एक की मन की बात है ।
सब ऐसा नहीं सोचते है ,
तो क्या करते है ?
ये एक कि मन की बात है । सब ऐसा नहीं सोचते है ।
तो क्या करते है ?
वो मेहनत करते है ।
बोलने में ,
बैठने में ,
चलने में ,
इन्हें सभ्य समाज में रहना है ।
परमार्थ में बोलना है ।
परमार्थ के लिए बैठना है ।
कारो से चलना है ।
पर ये ऐसा कुछ नहीं करते ।
ये स्वार्थ में बोलते है ,
स्वार्थ को बैठते है ,
और ऐसा करते हुए जब थक जाते है ।
तो हम मेहनत करते है , बोलते है ।
हमे आराम करना है ,
तो बैठते है ।
और जब घर जाना है ,
तो कारो से चलते है ।
चुकि ये एक की मन की बात है ।
सब ऐसा नहीं सोचते है ,
तो क्या करते है ?